संविधान

देशवासियों से अपील

हमारे पूर्वजों ने देश की दासता से मुक्ति दिलाने के लिए बहुत बड़ी कुर्बानी दी थी। हजारों नौजवानों ने आजादी की बलिवेदी पर प्राणाहुति दे दी। असंख्य मॉं-बहनों, बहू-बेटियों का सिंदूर लुट गया। इस कुर्बानी के पीछे केवल यही तमन्ना थी कि मुल्क आजाद हो, हमारे देश में हमारा शासन हो। हम अपने हाथों अपना भविष्य लिखेंगे। लेकिन उस सोच को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका और सब कुछ एक सपना बन कर रह गया। महात्मा गॉंधी, सरदार पटेल, डा0 लोहिया और डा0 अम्बेडकर के सपनों का भारत सत्य, अहिंसा, समाजवाद, भाईचारा, सौहार्द को तिलांजलि देकर छल, कपट, आतंकवाद, भ्रष्टाचार, भाई भतीजावाद, चोरी, डकैती, हत्या, अभिचार, बलात्कार का शिकार होकर आजादी का माखौल बनकर रह गया है। इसका एकमात्र कारण राजनेताओं के चरित्र और राजनैतिक दलों में आई गिरावट है। यही कारण है कि जो खद्दर कभी पवित्रता की पहचान थी वह आज बईमानी की निषानी बन गया है। राजनैतिक दलों की गिरावट के कारण देश अराजकता का शिकार है और स्वर्ण युग कहलाने वाला देश भिखारी बन गया।
आज जो भी राजनैतिक दल है चाहे समाजवादी, साम्यवादी, पूंजीवादी, सम्प्रदायवादी, गॉंधीवादी, लोहियावादी और अम्बेडकरवादी का लेबिल लगाकर अलग-अलग होने का स्वांग करते है लेकिन सब एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं भ्रष्टाचार, बेईमानी, घूसखोरी, आतंकवाद और राजनैतिक माफियाओं से देश और समाज को बचाने के लिए नवयुवकों को आगे आना होगा। इसी कड़ी में दिनांक 4 नवम्बर 1995 में नई राजनैतिक और सामाजिक सोच के साथ किसान, मजदूर और उपेक्षित लोगों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई लड़ने के लिए ‘‘अपना दल’’ का गठन किया गया है। जिसका विधान, सिद्धान्त, वक्तव्य एवं नीति और कार्यक्रम प्रस्तुत है जिसे पढ़कर आप स्वयं इस दल की विशेषता का अनुभव करेंगे। तमाम सिद्धान्त और आचरणहीन दलों को त्यागकर आप नीति और कार्यक्रम वाले दल को प्राथमिकता दें जिससे देश पुनः दुनिया का सिरमौर बन सके।

श्रीमती कृष्णा पटेल
राष्ट्रीय अध्यक्ष
अपना दल का विधान


1. दल का नाम - दल का नाम ‘‘अपना दल’’ होगा।
2. झंडा - लम्बाई और चौड़ाई का अनुपात 15ग1 होगा। नीचे का आधा भाग नीला और ऊपर का आधा भाग केसरिया होगा। बीच में भारत के नक्शे में संसद भवन का चित्र होगा।
3. उद्देश्य- जाति और धर्म से ऊपर उठकर सम्पूर्ण देशवासियों में शिक्षा के माध्यम से वैज्ञानिक सेच पैदा करके परस्पर भाई-चारे के साथ मानववादी समाज की रचना करके और सदियों से उपेक्षित, तिरस्कृत लोगो को उनके अधिकार और सम्मान दिलाकर भारत को पुनः स्वर्ण युग तक पहुंचाना।
4. सदस्यता - ‘अपना दल’ के दो प्रकार के सदस्य होंगे।
(क) साधारण सदस्यः 18 वर्श य उससे अधिक उम्र का कोई भी ईमानदार, सचरित्र व्यक्ति जो दल की नीतियों में विश्वास रखता हो, दल की राष्ट्रीय समिति व द्वारा निर्धारित शुल्क देकर दल का साधारण सदस्य बन सकता है।
(ख) सक्रिय सदस्यः पच्चीस साधारण सदस्य बनाने वाला एवं सदस्यता षुल्क जमा करने वाला प्रत्येक व्यक्ति ‘अपना दल’ का सक्रिय सदस्य होगा। सक्रिय सदस्य ही समितियों के सदस्य और पदाधिकारी का चुनाव लड़ने के अधिकारी होंगे।
5. सदस्यता शुल्क - साधारण सदस्यता शुल्क 10/- वार्षिक होगा। एवं समयानुसार राश्ट्रीय समिति द्वारा निर्धारित किया जायेगा। यह सदस्यता तीन वर्श के लिए मान्य होगी। लेकिन चुनाव न होने की दशा में अगले सदस्यता अभियान तक के लिए मान्य होगी।
सदस्यता से प्राप्त धनराषि का 40 प्रतिषत जिला इकाई में रखा जायेगा, 40 प्रतिषत प्रदेष और 20 प्रतिषत केन्द्र को भेजा जायेगा।
6. संगठन - ब्लाक, विधान सभा, जिलों, मंडल, प्रान्त और राष्ट्र स्तर की एक-एक समितियां होंगी। इनके सहयोग के लिए इसी स्तर के छात्र मंच, युवा मंच, किसान मंच, महिला मंच, सहकारिता प्रकोष्ठ, विधि प्रकोष्ठ, पषु पालक मंच, अखिल भारतीय औद्योगिक मजदूर मंच, सांस्कृतिक, जन-चेतना मंच आदि संगठन होंगे। एक केन्द्रीय संसदीय समिति, राष्ट्रीय सलाहकार समिति, अनुशासन समिति होगी। इन समितियों में एक अध्यक्ष, और एक सचिव होंगे। प्रत्येक स्तर की समिति में सभी वर्गों को आबादी के आधार पर प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया जायेगा। आवष्यकता पड़ने पर ग्राम पंचायत और बूथ स्तर पर भी समिति गठित की जायेगी।
(क) राष्ट्रीय समितिः इसमे ंएक राष्ट्रीय अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष, 6 राष्ट्रीय महासचिव, एक राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और एक कार्यालय सचिव होंगे। शेष राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य कहलायेंगे। राश्ट्रीय कार्यसमिति कुल 50 सदस्यों वाली होगी।
(ख) प्रान्तीय समितिः इसमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष, 6 महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, एक कार्यलय सचिव एवं शेष प्रान्तीय समिति सदस्य कहलायेंगे। प्रान्तीय कार्यसमिति कुल 50 सदस्यों वाली होगी।
(ग) मंडलीय समितिः इसमें एक अध्यक्ष, एक महासचिव शेष मंडल समिति के सदस्य कहलायेंगे। इस समिति में कुल 20 सदस्य होंगे।
(घ) जिला समितिः जिसमें एक जिला अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, एक महासचिव, एक कोषाध्यक्ष और शेष जिला समिति के सदस्य कहलायेगें। इस समिति में कुल 15 सदस्य होंगे।
(ड) विधान सभा समितिः जिसमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष, एक सचिव शेष विधान सभा समिति के सदस्य कहलायेगे। इस समिति में कुल 15 सदस्य होंगे।
(च) ब्लाक समितिः इसमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष, एक सचिव और शेष ब्लाक समिति के सदस्य कहलायेगे। इस समिति में कुल 15 सदस्य होंगे।
(छ) बूथ समितिः इसमें एक अध्यक्ष, एक सचिव और षेश बूथ समिति के सदस्य कहलायेंगे। इस समिति में कुल 10 सदस्य होंगे।
(ज) केन्द्र संसदीय समिति (ब्मदजतंस च्ंतसपंउमदजंतल ठवंतक ) : यह राष्ट्र स्तर की समिति होगी। जिन राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में 20 या इससे कम संसदीय क्षेत्र हैं उस राज्य/क्रेन्द्र शासित प्रदेश से एक और 20 से अधिक संसदीय क्षेत्रों वाले राज्यों से दो सदस्य रखे जायेंगे। राष्ट्रीय समिति की अध्यक्ष इस समिति का भी अध्यक्ष होगा एवं एक सचिव भी होगा।
(झ) राष्ट्रीय सलाहकार समिति (छंजपवदंस ।कअपेवतल ब्वउउपजजमम)ः इस समिति में 20 सदस्य होंगे। जो राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञ होंगे। जिसमें एक अध्यक्ष, एक सचिव, शेष सदस्य होंगे। इन सदस्यों को राष्ट्रीय समिति 2/3 बहुमत या सर्वसम्मति से नामित करेगी।
(ट) अनुशासन समिति (क्पेबपचसपदंतल ब्वउउपजजमम)ः यह राश्ट्रीय स्तर की होगी। इसमें 10 सदस्य होंगे, जिनमें एक अध्यक्ष और एक सचिव होंगे।
7. संगठन के कार्यः
(क) राष्ट्रीय समितिः दल की नीति निर्धारित करना, संगठन को सुदृढ़ बनाना, नीति और कार्यक्रम का प्रचार प्रसार करना तथा दल के संगठनात्मक चुनाव नियमानुसार सम्पन्न कराना। दल के विधान और सिद्धान्तों में 2/3 बहुमत या सर्वसम्मति से संशोधन करना।
(ख) प्रान्तीय समितिः राष्ट्रीय समिति के निर्णयों एवं आदेशों का पालन करना, संगठन को सुदृढ़ बनाना एवं प्रान्त स्तर की समस्यओं पर दल के सिद्धान्तों के अनुसार कार्य करना।
(ग) मण्डलीय समितिः उच्च समितियों के आदेशों एवं निर्देशों का पालन करना एवं संगठन को सुदृढ बनाना। दल की नीति और कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार करना। मंडल के सभी जिलों में संगठन तैयार कराने एवं कार्यक्रम चलाने में सहयोग करना।
(घ) जिला समितिः उच्च समितियों के आदेशों और निर्देशों के अनुसार संगठन को मजबूत बनाना एवं नीति और कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार करना।
(च) विधान सभा समितिः विधान सभा का स्तर दल के कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार करके संगठन को मजबूत बनाना।
(छ) ब्लाक समितिः दल के कार्यक्रम और नीति को गांव तक पहुंचाकर संगठन के मजबूत बनाना। जनता में राष्ट्र प्रेम की भावना पैदा करना। उसके अधिकार और दायित्वों की जानकारी देकर जागरूक बनाना। ग्राम और बूथ स्तर तक कार्यकर्ता तैयार करना। चुनाव के दौरान वोट डलवाने और अफवाहों एवं बूथ कैप्चरिंग को रोकना। मतदाता सूची तैयार करना।
(ज) केन्द्रीय संसदीय समितिः विधान सभा या संसद के चुनाव में प्रदेशों/जिलों से संस्तुति सूची को अंतिम रूप देना। अन्य किसी प्रकार के चुनाव के लिए समिति का गठन करना या निर्देश जारी करना। टिकट वितरण के विवाद को सुलझाना।
(झ) राष्ट्रीय सलाहकार समितिः इस समिति के सदस्य देश, विदेश के ख्याति-लब्ध अर्थशास्त्री, वैज्ञानिक, अधिवक्ता, डाक्टर, इंजीनियर, कृषि विश्ेषज्ञ होंगे। आदमी की आम जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार को निःशुल्क सलाह देंगे। संगठन और सरकार के क्रिया-कलापों तथा देष के संविधान के अनुसार कार्य करने हेतु आवष्यकतानुसार सलाह देंगे।
(ट) राष्ट्रीय अनुशासन समितिः दल में अनुशासन कायम रखना। प्रान्तीय पदाधिकारी इससे ऊपर के पदाधिकारियों के विरूद्ध शिकायतों की जांच करके दल के किसी पदाधिकारी द्वारा अपने उच्च पदाधिकारी के विरूद्ध उत्पीड़न सम्बन्धी शिकायतों को जांच करना तथा झूठी शिकायत करने वाले के विरूद्ध अनुशसनात्मक कार्यवाही हेतु आख्या देना इस समिति का कार्य होगा। यह समिति कार्यवाही करने के लिए राष्ट्रीय समिति को अपनी आख्या देगी।
(ठ) प्रान्तीय अनुशासन समितिः जिला से मंडल तक के सभी पदाधिकारियों की शिकायतों की जांच करके कार्यवाही के लिए प्रान्तीय समिति को अपनी आख्या देगी। जिला पदाधिकारी से नीचे की शिकायत पर जांचोपरान्त कार्यवाही करने का अधिकार जिला समिति को होगा। संगठन और सरकार के नीति विरूद्ध कार्य करने पर समिति राष्ट्रीय अध्यक्ष को अवगत करायेगी। आवश्यकता पड़ने पर इस समिति को राष्ट्रीय समिति की बैठक बुलाने का अधिकार होगा। राष्ट्रीय समिति की बहुमत का फैसला मान्य होगा।
8. संगठन के पदाधिकारियों के कार्यः
(क) अध्यक्ष : ब्लाक से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपने-अपनी कार्य समिति की बैठक की अध्यक्षता करना। ऊपर से प्राप्त निर्देश या कार्यक्रम को लिखित रूप में लागू करना। अपनी कार्यसमिति में लिये गये निर्णय से उच्च समितियों को अवगत कराना।
(ख) उपाध्यक्षः अध्यक्ष की अनुपस्थिति में राश्ट्रीय कार्यकारिणी या राश्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता उपाध्यक्ष करेगा। समय-समय पर अध्यक्ष द्वारा आदत्त अधिकारों के तहत वह सभी कार्य करेगा।
(ग) महासचिवः कार्यसमिति का एजेण्डा अध्यक्ष की परामर्श से तैयार करना। बैठक का संचालन करना एवं लिए गये निर्णय को जारी करना। जनसभा में मंच का संचालन करना। कार्यालय में प्राप्त पत्रों को निस्तारण कराना।
(घ) कार्यलय सचिवः यह केवल प्रान्तीय और राष्ट्रीय कार्यालय में होंगे। यह अध्यक्ष के निर्देषानुसार कार्यो का संचालन करेंगे।
(ड) समितियों के सदस्यगणः यह सभी अपने स्तर की समितियों की कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेंगे और संगठन को मजबूत बनाने का कार्य करेंगे, यह अपनी जाति से नेता और कार्यकर्ता भी तैयार करने के लिए जिम्मेदार होंगे। विधानसभा और ब्लाक समितियों में सचिव ही महासचिव का कार्य करेंगे।
(च) कोषाध्यक्षः जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय समिति में एक-एक कोषाध्यक्ष होंगे। इनका काम आय-व्यय का हिसाब रखना और आवश्यक अभिलेख को सुरक्षित रखना। सदस्यता रसीद का विवरण भी इन्हीं के जिम्मे होगा।
9. समितियों का कार्यकालः ब्लाक से राष्ट्रीय समिति तक तथा उसकी सहयोगी समितियों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। अपरिहार्य कारणों से राष्ट्रीय सलाहाकार समिति के परामर्ष से अगले 6 माह तक बढ़ाया जा सकेगा। समितियां भंग करने की प्रकियाः यदि कोई समिति संगठन की नीति के अनुसार कार्य करने में सफल नहीं हो पा रही है तो उसे राष्ट्रीय समिति कभी भी भंग कर सकती है एवं नई समिति का गठन कर सकती है।
10 चुनाव प्रक्रियाः संविधान के अनुसार कार्यकाल समाप्ति के दो माह पूर्व सदस्यता अभियान चलाकर सक्रिय सदस्य बनायें जायेंगे। यह अभियान एक माह के लिए होगा। आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय समिति समय बढ़ा सकती है। तीन साल के अन्दर बने सक्रिय सदस्य ही मतदाता होंगे। राष्ट्रीय समिति चुनाव की तिथि निर्धारित करेंगी और चुनाव की व्यवस्था करेंगी। राश्ट्रीय सलाहकार समिति चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति करेगी और अपनी देख-रेख में चुनाव कार्य का संचालन करेगी।
सर्वप्रथम ब्लाक समितियों का चुनाव होगा। सभी क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से आबादी के अनुसार चुनाव क्षेत्र निर्धारित किया जायेगा। ब्लाक समिति का चुनाव सम्पन्न होने के बाद ब्लाक समिति के सदस्य अपने बीच से संबंधित विधानसभा, जिला और मण्डल के लिए एक-एक प्रतिनिधि का चुनाव करेंगे। यदि मण्डल की समिति की संख्या इस प्रकार से पूर्ण नहीं होती है तो शेष सदस्यों को प्रदेश समिति नामित करेगी। प्रदेश समिति को राष्ट्रीय समिति द्वारा नामित किया जाएगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा राष्ट्रीय समिति के अन्य सदस्य नामित किये जायेंगे। इस प्रकार सभी समितियों के चुने गये प्रतिनिधि अपने आवष्यकतानुसार अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष कार्यालय सचिव का चुनाव करेंगे। कोशिश होनी चाहिए कि सभी जाति और धर्मे के लोगों को प्रतिनिधित्व मिल सके। यह कार्यवाही ब्लाक से ही शुरू होनी चाहिए।
प्रत्येक प्रदेश समिति के सदस्य अपने प्रदेश से निर्धारित संख्या में केन्द्रीय संसदीय समिति के सदस्यों का चुनाव करेंगे इस पद के लिए प्रदेश समिति का कोई भी सदस्य चुनाव लड़ सकता है। संसदीय समिति का अध्यक्ष राष्ट्रीय समिति का अध्यक्ष होगा। चुनाव न हो पाने की स्थिति में राष्ट्रीय समिति सदस्यों को नामित कर सकती है।
राष्ट्रीय अनुशासन समिति का चुनाव राष्ट्रीय समिति और सभी प्रदेष अध्यक्ष करेंगे। समिति के सदस्य अपने बीच से अध्यक्ष और सचिव का चुनाव करेंगे।
राष्ट्रीय सलाहकार समिति के सदस्यों को राष्ट्रीय समिति दो तिहाई बहुमत के सर्वसम्मति से नामित करेगी। यह समिति स्वैच्छिक रूप से काम करेगी।
11 सदस्यता की समाप्तिः ‘‘अपना दल’’ से त्याग पत्र देने या दूसरे दल की सदस्यता ग्रहण करने पर दल की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जायेगी। प्रत्येक सक्रिय सदस्य, सदस्यता का नवीनीकरण न करोन पर दलीय चुनाव और बैठकों में भाग न ले सकेगा। अनुशासनात्मक कार्यवाही के फलस्वरूप लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहने पर दल विरोधी कार्य करने पर भी दल की सदस्यता समाप्त हो जायेगी।
12 अनुशासनः दल में अनुषासन कायम रखने के लिए जिला कमेटी सदस्य से ऊपर के सभी पदाधिकारियों को षिकायतों की जांच करके कार्यवाही करना। दल के किसी भी पदाधिकारी द्वारा अपने उच्च पदाधिकारी के विरूद्ध उत्पीड़न सम्बन्धी षिकायतों की जांच करना/ झूठी षिकायत करने वाले के विरूद्ध/ अनुषासनात्मक कार्यवाही करना यह समिति कार्यवाही करने के लिए राश्ट्रीय समिति को अपनी आख्या देगी जिसमें अन्तिम निर्णय राश्ट्रीय समिति का होगा एवं सर्वमान्य होगा। जिला समिति के सदस्य से नीचे के षिकायतों पर जांचोपरांत कार्यवाही करने का अधिकार जिला समिति का होगा।
13 दल का बैंक एकाउण्टः जिला प्रान्त और राष्ट्रीय स्तर की समिति का एकाउण्ट किसी राष्ट्रीयृंत बैंक में खोला जायेगा जिसका संचालन उस समिति का अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर द्वारा किया जायेगा। आय-व्यय का रख-रखाव कोषाध्यक्ष द्वारा संपादित होगा। जिसका अध्यक्ष के कार्यकाल समाप्त होने के पूर्व चार्टड एकाउन्टेन्ट से आडिट कराकर आडिट रिपोर्ट संबंधित कार्यकारिणी में प्रस्तुत करना होगा। प्रान्तीय एवं राष्ट्रीय खाते में जमा धन व्यय राष्ट्रीय समिति के अनुमोदन से ही संभव होगा। 15 दल के धन के व्यय की प्रक्रियाः
(क) राश्ट्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारी प्रतिवर्श रूपये 3000/- सदस्य प्रति वर्श 2500/- प्रान्तीय कार्यकारिणी के पदाधिकारी प्रतिवर्श रूपये 2000/- सदस्य प्रतिवर्श 1500/- जिला कार्यकारिणी-नगर निगम कार्यकारिणी, नगर पालिका कार्यकारिणी के पदाधिकारी प्रतिवर्श रूपये 1000/- तथा सदस्य प्रतिवर्श 500/- विधानसभा क्षेत्र कार्यकारिणी के पदाधिकारी प्रतिवर्श रूपये 500/- तथा सदस्य प्रतिवर्श रूपये 200/- पार्टी कोश में जमा करेंगे। पार्टी द्वारा निष्चित अवधि के अन्दर निर्धारित चन्दा जमा न करने वाले सदस्यों/पदाधिकारियों की कार्यसमिति से सदस्यता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
(ख) जिला स्तर पर किसी कार्यक्रम के लिये प्रदेश इकाई से इजाजत लेकर रसीद कूपन छपवाकर दल के नाम चन्दा लिया जा सकता है। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद आय-व्यय का विवरण प्रदेश इकाई को देना अनिवार्य होगा। जिला स्तर से नीचे कोई इकाई रसीद या कूपन नही ंछपवा सकती है।
(ग) समस्त चुनावी आवेदन शुल्क एवं विशेष सहयोग (चंदे) के रूप में प्राप्त धनराशि का पूर्ण रूप से केन्द्रीय खाते में रखा।
15 संशोधनः ‘‘अपना दल’’ के नीति और कार्यक्रम तथा विधान में संशोधन राष्ट्रीय समिति के दो तिहाई बहुमत या सर्वसम्मत से की।

सिद्धान्त और वक्तव्य


हमारा देश विभिन्न जाति और धर्मों का देश है। सबको अपनी अपनी सभ्यता, सांस्कृतिक रहन-सहन, रीति रिवाज है। इन सभी लोगों के विकास के ही साथ देश का विकास सम्भव है लेकिन आजादी का फायदा कुछ मुट्ठी भर लोग ही उठा सके है। उत्तम उपजाऊ भूमि, जड़ी बूटी से युकत वन सम्पदा और खनिज पदार्थों से भरपूर धरती होने के बाद भी आदिवासी समाज तक आज भी विकास की किरण नहीं पहुंच सकी। यहाँ कुल आबादी का 86 प्रतिशत भाग गांव में बसता है और कुल आबादी का 76 प्रतिशत हिस्सा अपनी जीविका के लिए कृषि पर निर्भर करता है। आजादी के बाद खेतिहर तबके के विकास के लिए कोई नीति ही नहीं बनी। इसका नतीजा है कि 67 साल बीतने के बाद भी अभी तक कृषि योग्य भूमि के एक तिहाई हिस्से के लिए ही सिंचाई की व्यवस्था की जा सकी है। एक तिहाई भाग प्रत्येक वर्ष बाढ़ और सूखा से प्रभावित रहता है। ग्रामीण इलाकों में अभी भी 25.96 प्रतिशत लोग निरक्षर है। एक ओर जहां चन्द पूंजीपतियों की सम्पत्ति में 100 प्रतिशत से भी ज्यादा वृद्धि हुई। वहीं पर गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वालों का प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में 27 और षहरी क्षेत्रों में 33 हो गया। इन्हीं गरीबों, किसानों, मजदूरों, आदिवासियों के विकास के नाम पर अरबों रूपये का कर्जा लिया गया है।
गुलामी के दौरान स्वर्णयुग कहलाने वाला देश आजादी के बाद चौतरफा पतन की तरफ जा रहा है। आज विश्व में हमारा विकास में 71वां स्थान है। आर्थिक दृष्टि से हम विष्व में नीचे से 11वें स्थान पर है। कर्जा लेने में हम तीसरे स्थान पर है। भ्रष्टाचार में हमारा 7वां नम्बर है। अशिक्षा में हमारा दुनिया में 5वां नम्बर है। आज भी 10 परिवारों में से 4 परिवारों को दोनों वक्त का भोजन नहीं मिलता है। 10 में से 7 परिवारों को पौष्टिक आहार एवं 10 में से 3 आदमी को पूरा शरीर ढंकने का कपड़ा नहीं मिल पाता है। एक कोठरी में चार-पांच लोग रहते है। 25 प्रशित लोगों को खाद्यान्न का चौथाई भाग ही मिलता है। 5 करोड़ से ज्यादा लोग आधा पेट खाकर सो जाते है। आजादी के समय दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद में हमारा हिस्सा 2 प्रतिशत से घटकर 0.6 प्रतिशत रह गई। निर्यातक देशों में हम 15वें स्थान से 20वें स्थान पर आ गये। यह उस देश की तस्वीर है जो करोड़ों रूपया खर्च करके 67 साल की जश्नें आजादी मना चुका है।
15 अगस्त 1947 को जब अंग्रेज हमारा देश छोड़कर गये है तो इतना धन छोड़कर गए थे कि उस समय वह धन यदि लोगों में बांटा जाता तो प्रत्येक व्यक्ति को 60 रूपये मिलता लेकिन हमारे विकास के नाम पर सरकारों ने इतना कर्जा लिया कि (1992 में) इस देश का बच्चा-बच्चा 6600 रूपये का कर्जदार था। जो 1999 में बढ़कर लगभग 14000/- रूपया प्रति व्यक्ति हो गया है। हमारे देश का कुल विदेश कर्जा हमारे सकल घरेलू उत्पाद का 45 प्रतिशत और भारत सरकार की कुल सम्पत्ति का 97.11 प्रतिशत हो चुका है। नये कर्जे का एक तिहाई पुराने कर्जे का ब्याज अदा करने में चला जाता है।
यह कर्जा 31 मार्च 2014 तक बढ़कर 409 अरब 40 करोड़ हो गया है। जो प्रतिदिन प्रतिघण्टा की दर से बढ़ रहा है। हमारा देश आज जो भी निर्यात करता है उसका 80 प्रतिशत कर्जे के ब्याज अदा करने में चला जाता है। आखिर यह धन कहां जा रहा है। इस पैसे से किसका विकास हो रहा है, प्यासा इन्सान जब पानी मांगता है तो महात्मा गॉधी और हेडगेवार के चेलों द्वारा शराब पिलाई जाती है। भूखा, नंगा, बेघर जब रोटी, कपड़ा और मकान की बात करता है तो आश्वासन की लोरी सुला दिया जाता है। हमारे देश के पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण किसान और मजदूर की उपेक्षा है।
हमारे देश में पिछड़ेपन का दूसरा कारण भ्रश्टाचार है। हवाला काण्ड के सभी दलों को नंगा कर दिया है। इसमें उच्च न्यायालय ने भी अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह देष भगवान भरोसे चल रहा है केवल हवाला व्यापार से हमारे देष को प्रतिवर्श 2 खरब 80 अरब का नुकसान हो रहा है। यूटीआई घोटाला, क्रिकेट मैच, फिक्सिंग घोटाला म्युचुअल फंड घोटाला, मधु कोड़ा घोटाला, सत्यम घोटाला, राश्ट्र मण्डल खेल घोटाला, चीनी घोटाला, यूरिया घोटाला, चारा घोटाला, तारकोल घोटाला, पुलिस वर्दी घोटाला, बोफोर्स दलाजी जैसे सैकड़ा जघन्य घोटाले जो आज उजागर हो चुके है। इन घोटालों की नींव 1948 पड़ गई थी। लेकिन इनमें लिप्त लोगों को सजा देने के बजाय प्रोत्साहन दिया गया। जिसमें धीरे-धीरे विष्फोटक रूप धारण कर लिया। राजीव गांधी ने संसद में स्वीकार किया था कि हम दिल्ली से 1 रूपया भेजते हैं तो जनता तक 15 पैसा पहुंचता है। 85 पैसा लोग बीच में खा जाते है। जानकारी होने के बाद भी राजीव गांधी ने कभी इसको समापत करने के लिए कुछ नहीं किया। अरबों रूपया प्रतिवर्ष गरीबी मिटाने के नाम पर नेता और अधिकारी लूट कर विदेशों में जमा कर रहे है। पिछले 42 साल में नागालैण्ड के विकास पर 47 हजार करोड़ खर्च हुआ। नागालैण्ड की आबादी 12 लाख है यानि प्रति व्यक्ति 25 लाख खर्चा हुआ उसके बाद भी नागालैण्ड में आतंक का साया है। यह धन भ्रष्टाचार की बलि चढ़ गया। इसीलिए गरीबी, बेरोजगारी और आतंक बढ़ गया है। 41सौ अरब रूपया हमारे देश का विदेशों में जमा है। केवल स्वीटजरलैण्ड में 2800 अरब जमा है। यह पैसा यदि अपने देश के बैंक में जमा होता तो हमें कर्जा लेने की आवश्यकता नहीं पड़ता। उदारीकरण के नाम पर गरीबों को खून चूस कर पूंजीपतियों को सुविधा दी जा रही है और ये पूंजीपति आतंकवाद को बढ़ावा देने में पैसा खर्च कर रहे है।
राष्ट्रपिता बापू ने आजादी के बारे में कहा था ‘‘कि सच्चा स्वराज उस दिन होगा जब गहनों से लदी हुई सोलह साल की सुन्दर लड़की अकेले कश्मीर से यात्रा करती हुई कन्याकुमारी सुरक्षित पहुंच जायेगी’’। बापू की इस कल्पना के विपरीत उनके चेलों ने 67 साल में ऐसा वातावरण बना दिया कि आज अंधी, लूली, लंगड़ी और पागल औरत तक की इज्जत आबरू सुरक्षित नहीं रह गई। ‘‘यत्र नारयस्तु पूज्यते रमन्ते तत्र देवा’’ जैसी धर्म शास्त्रों में व्यवस्था के बाद भी औरत के टुकड़े-टुकड़े मगरमच्छ को खिलाने दहेज के नाम पर रोज जलाने और मॉ-बाप के सामने बलात्कार जैसे घृणित और दिल दहलाने वाली घटनायें आम बात हो गई है। रूपकुंवर नामक लड़की को धर्म के नाम पर आग के हवाले कर दिया गया। सामाजिक बदलाव की लड़ाई लड़ने वाली भंवरी देवी के साथ बलात्कार होने पर मनुवादी मानसिकता का जातिवादी फैसला देकर अन्याय करता है। नंगे और अश्लील चित्र छापकर औरत को केवल प्रचार का माध्यम बना दिया गया है। देश की आधी आबादी औरतों की हैं और उनके साथ यदि अमानसिक कृत्य जारी रहा तो देश कभी खुशहाल नहीं हो सकता है। औरत को राजनीति में नहीं नौकरी में 50 प्रतिशत आरक्षण एवं सामाजिक बराबरी देने की आवश्यकता है। हमारे देश की न्याय व्यवस्था भी बहुत लचर और खर्चीली है। पैसे वाला पैसे के बल पर न्याय खरीद लेता है और गरीब आदमी मुकदमा लड़ते-लड़ते अपना सब कुछ गंवा देने के बाद भी न्याय नहीं पाता है। जनवरी 1975 में रेल मंत्री श्री ललित नारायण मिश्रा के समस्तीपुर रेलवे स्टेषन बिहार पर बम बलास्ट में हुई मृत्यु पर 39 वर्श बाद भी एवं उनके परिजनों को न्याय नहीं मिल सका। 1985 में इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद पूरे देश में सिक्खों को तबाह कर दिया गया। 29 साल बीतने के बाद भी अभी तक केवल नीचे की दो अदालतों ने फैसला दिया है। प्रधानमंत्री राजीव गांधी मार दिये गये। अयोध्या का मन्दिर-मस्जिद विवाद 1948 से चल रहा है जिसमें कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। दूसरी तरफ कृष्ण मोहन पाण्डेय जिला जज फैजाबाद में केवल 10 दिन में ताला खुलवाकर न्याय का गला घोंट दिया। 1947 से आज तक किसी हिन्दु-मुस्लिम दंगे में किसी को सजा नहीं मिली। बिहार का पड़रिया भंवरी देवी काण्ड, मण्डल कमीशन का फैसला संविधान विरोधी और जाति पर आधारित फैसले है। देर से फैसला या जाति पर आधारित फैसला अन्याय को जन्म देता है। इस व्यवस्था को बदल कर त्वरित समयबद्ध और सस्ता न्याय उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
आजादी के बाद मुसलमान और बौद्धों के आर्थिक और शैक्षिक स्तर में बड़ी तेजी के साथ गिरावट आई है। किसी भी दल और नेता ने कभी भी इनके रोजी-रोटी, शिक्षा ओ सम्मान के बारे में सोचने की कोशिश नहीं की। उल्टे भारतीय जनता पार्टी का डर दिखाकर शोषण करने का प्रयास किया है। जब इस देश का दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक इकट्ठा होकर अधिकार और सम्मान की बात सोचता है तो उसे असली लक्ष्य की तरफ से हटाकर साम्प्रदायिक शक्तियां मन्दिर-मस्जिद और हिन्दू-मुसलमान के चक्कर में उलझा देती हैं। जिससे भूख इन्सार आपस में लडकर अपना सब कुछ गंवा देता है और पुनः उन्हीं लुटेरों को अपना रहनुमा मान लेता है। ‘अपना दल’ ने इन्हीं 76 प्रतिशत किसान मजदूरों के विकास को अपना आधार मानकर अपनी नीति और कार्यक्रम तैयार किया है।
विचारणीय विषय यह है कि क्या वास्तव में हमारा देश इतना गरीब है कि इसे इस हालत में पहूंचाया जा रहा है। आजादी के बाद हमारे देश के कर्णधारों ने दुनिया की चकाचौंध की अंधी नकल करके असली समस्या के विपरीत योजनाएं बनाकर ऐसा हालात पैदा कर दिये। भारत कृषि प्रधान देश कहलाता है लेकिन आजादी के बाद अभी तक कोई कृषि नीति नहीं बनी। पहली पंचवर्षीय योजना में कृषि पर 37 प्रतिशत व्यय किया गया। धीरे-धीरे यह धनराशि घटते-घटते आठवी पंचवर्षीय योजना तक केवल 18 प्रतिशत रह गयी। जिसके कारण प्रथम पंचवर्षीय योजना में कुल राष्ट्रीय आय में कृषि का योगदान 56 प्रतिशत से घटकर आठवी योजना में केवल 30 प्रतिशत रह गया। इसी का नतीजा है कि कृषि पर निर्भर रहने वाली आबादी बुरी तरह प्रभावित हुई। बड़ी जीत छोटी होती गई, छोटा किसान मजदूर बनता जा रहा है और मजदूर अपना घर छोड़कर शहर भाग रहा है। इसलिए दुनिया में सबसे बढ़िया मिट्टी, आबोहवा और मेहनती कृषक होने के बाद भी हमें बाहर से अनाज, खाद्य तेल और चीनी मंगाना पड़ रहा है।
हमारे देश में 16 करोड़ 60 लाख हेक्टेयर में से 14 करोड़ 10 लाख हेक्टेयर में ख्ेती होती है। जिसमें से केवल 9.80 करोड हेक्टेयर सिंचित है। 40 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि 3 प्रतिशत परिवारों के पास है और 97 प्रतिशत परिवारो के पास केवल 60 प्रतिशत भूमि है। तरक्की के अन्य साधन भी इन्हीं 3 प्रतिशत परिवारों के पास है। देश की कुल भूमि की 39.42 प्रतिशत भूमि ऊसर या बंजर है। विश्व मे अमेरिका के बाद प्राकृतिक जल हमारे देश में ही पाया जाता है लेकन 70 प्रतिशत आबादी को पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है केवल 32 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि को सिंचाई की व्यवस्था हो सकी है। देश की नदियों की क्षमता 20 करोड़ एकड़ फुट पानी सम्हालने की है लेकिन चार माह के बरसात में उनमें 145 करोड़ एकड़ फुट पानी बहता है। जिससे 40 मिलियन हेक्टेयर में बाढ़ जाती है। नियोजित ढंग से काम करके इसमें से 32 मिलियन हेक्टेयर को बचाया जा सकता है। पिछले 42 साल में 50 अरब से जयादा बांधों पर खर्च हुआ और अरबों रूपया बाढ़ और सूखा राहत पर खर्च करके केवल 12 मिलियन हेक्टेयर को राहत पहुंचाई जा सकी। बरसात के दिनों के फालतू पानी को रोक कर पीने और सिंचाई के पानी का इन्तजाम किया जा सकता है। देश में लगभग दो तिहाई किसान लघु और सीमान्त किस्म के हैं। इनको ख्ुशहाल बनाने के लिए कृषि से आदमियों को कम करके दूसरे काम में लगाना पड़ेगा। जिसका हर लघु और कुटीर उद्योगों का जाल बिछाकर किया जा सकता है और उनके लिए कच्चा माल कृषि से तैयार करना पड़ेगा यह काम ऊसर बंजर को उपजाऊ बनाकर और असिंचित जमीन को सिंचित बनाकर तथा बेनामी जमीनो ंको छोटे और भ्ूमिहीन किसानो ंकी उपलब्ध कराकर किया जा सकता है।
आजादी के बाद हमारे देश की योजनाएं शुद्ध रूप से जाति और धर्म के आधार पर तैयार की गइ। जिसमें विकास के बजाय आपस में द्वेष की भावना पैदा हुई। गरीबी को साधन और बेरोजगारों को काम देने के बजाए अनुदान की संस्कृति पैदा करके आदमी को निठल्ला बना दिया गया है। अपना दल जाति और धर्म के बजाए परिस्थ्तियों के अनुसार लोगों को दो भागों में बांट कर विकास की योजना बनाने की आवश्यकता महसूस करता है।
1. नगर और कस्बों में रहने वाले लोग।
2. गांव और देहात में रहने वाले लोग।
दोनों तरह के लोगों की जीविका के साधन अलग अलग है। लेकिन एक दूसरे का विकास एक दूसरे का पूरक है। गांव का आदमी खेतों पर निर्भर है तो शहर का आदमी गैर कृषिगत पेशा (व्यापार, उद्योग, नौकरी आदि) से जुड़ा हुआ है। आदमी चाहे शहर का हो या गांव का एक अच्छे इन्सान की जिन्दगी जीने के लिए सबको बढ़िया कपड़ा, संतुलित भोजन, सुविधाजनक मकान और सम्मान की आवश्यकता है। जब गांव का किसान मजदूर खुशहाल होगा तब नगर के व्यवसाय ओर उद्योगपतियों को सामान ज्यादा बिकेगा। सही मायने में देश का विकास करना है तो गांव के 76 प्रतिशत कृषि पर आधारित काछी, शाक्य, मोर्य, सैनी, कुर्मी, कुनबी, पटेल, पाटीदार, यादव, अहीर, लोध, किसान, जाट, सिक्ख, गूजर, मुसलमान, राजभर, केवट, बिन्द, निषाद, कश्यप, पाल, बघेल, लोनिया, चौहान, चमार, पासी, जाटव, बेलदार, कठेरिया, धानुक, धीमर, कौल, भील, आदि एवं अन्य किसान और मजदूर जातियों को विकास की मुख्यधारा में जोड़ना होगा।
इसी तरह शहरों में गैर कृषिगत पेशे से जुड़े लोग जैसे व्यापारी दुकानदार चौरसिया, नाई, दर्जी, खटिक, वाल्मीकि, लोहार, बढ़ई, ठठेरा, हलवाई, तेली, भूज, कलवार, सोनार, अंसारी, कुरैशी, रंगरेज, कहार, कुम्हार, मैकेनिक, ठेले वाला, कुंजड़ा, रिक्शे वाले तथा अन्य छोटे-मोटे कामों के सहारे जीने वाले लोग हैं। आजादी के बाद चन्द पूंजीपतियों को ही सारी सुविधायें उपलब्ध कराई गई। जिसके कारण इस देश की धन-दौलत, उद्योग और व्यापार पर चंद लागों का कब्जा हो गया और बहुत बड़ी आबादी गरीबी और मुफलिसी में जीने को बाध्य है। राजनेताओं और गुण्डों की सांठ-गांठ के कारण मध्यम दर्जे का आदमी गुण्डा टैक्स, अपहरण, फिरौती का भी श्किर है। भुक्तभोगी समाज जब इसके खिलाफ लामबद्ध होने की कोशिश करता है तो धूर्त और स्वार्थी तत्व इन्हें आपस में जाति और धर्म के नाम पर लड़ाकर लड़ाई की दिशा को बदल देते हैं। इसलिए आम आदमी को इस व्यवस्था के खिलाफ जागरूक बनाना होगा। गरीबों के संगठित होने में जाति और धर्म में सबसे बड़ी बाधा है। इस सत्य से लोगों की अवगत कराना और मक्कारों से सावधान करना होगा।
आज पूंजीपति समाजवाद के नाम पर 14 अगस्त 1947 तक अंग्रेजों के साथ लड़े वाला सामंत सामाजिक न्याय के नाम पर लोगों में आतंक और दहशत पैदा करने वाला डकैत, गुण्डा सुरक्षा के नाम पर वोट मांगता है। भोली भाली, अपने हक और कर्तव्य से अनभिज्ञ जनता ने इन्हें सांसद और विधायक बनाकर पवित्र संसद ओर विधान सभाओं को चोर, लुटेरे, गुण्डों, दलालों, घूसखोरों और बलात्कारियों का अड्डा बना दिया है। इससे मुक्ति पाने के लिए अपना दल सामाजिक न्याय और सामाजिक परिवर्तन के बजाय राजनैतिक परिवर्तन की बात करता है। ऐसा राजनैतिक परिवर्तन जो सदाचार, ईमानदारी और नीति पर आधारित हो। ऐसा राजनैतिक परिवर्तन जो सदियों से वंचित, उपेक्षित मेहनतकश कमेरों का राज स्थापित करके गुण्डों और लुटेरों से मुक्ति दिला सके। ऐसा राजनैतिक परिवर्तन जो सभी जाति और धर्म के लोगों को शासन, प्रशासन में हिस्सेदारी दिला सके। सभी जाति और धर्म का विकास हो सके इसलिए अपना दल बारी-बारी से सभी जातियों के मुख्यमंत्री बनाने का वचन देता है। साथ ही साथ भारत के सभी नागरिकों को खाना, कपड़ा, मकान और सम्मान की गारण्टी देता है।
अपना दल का मानना है कि गांव और गरीब का विकास का मतलब सम्पूर्ण किसानों और मजदूरों का विकास है और किसानों मजदूरों के विकास का मतलब है देहात ओर गांवों का विकास। आज गांवों में किसी प्रकार के जीनयापन की सुविधा न होने के कारण बहुत तेजी के साथ लोग गांव छोड़कर शहर भाग रहे है। ये लोग शहर में जाकर स्वयं तो नारकीय जीवन जीते ही हैं। शहर वालों के लिए बोझ और परेशानी का कारण बन जाते है। गांव से शहर के पलायन को रोकना है तो सारी सुविधाएं गांव में उपलब्ध करानी होगी जो शहर में मौजूद है तथा गांव और किसान का सर्वांगीण विकास सम्भव है और बिना गांव के विकास के देश का विकास असम्भव है। यही अपना दल का लक्ष्य है। ‘अपना दल’ देश की एकता, अखण्डता और चौमुखी विकास के लिए वैज्ञानिक शिक्षा के माध्यम से लोगों को जागरूक बनाकर परस्पर भाईचारा ओर सौहार्द कायम करके इस देश के पुनः दुनिया का सिरमौर बनाने का प्रयास करेगा। इन्हीं बिन्दुओं को ध्यान मे ंरखकर ‘अपना दल’ ने दिनांक 04 और 05 नवम्बर 1995 को बेगम हजरत महल पार्क, लखनऊ में अपने दो दिवसीय कार्यकर्ता सम्मेलन में सर्वसम्मति से निम्न नीति और कार्यक्रम तैयार किया है।
दिनांक 31 अगस्त 1996 को बेगम हजरत महल पार्क की आम सभा की बैठक में संशोधित कार्यक्रम को पुनः प्रस्तुत किया गया है। दिनांक 7,8,9 जून 1999 को भीमताल जिला नैनीताल के चिन्तर शिविर में लिए गए निर्णय के अनुसार संशोधित नीति और कार्यक्रम प्रस्तुत है। दिनांक 07 अक्टूबर 2014 को समस्त कार्यसमिति और सक्रिय सदस्यों की लखनऊ केन्द्रीय कार्यालय में बैठक के उपरान्त प्रदत्त अधिकारों के तहत लिए गये निर्णय के अनुसार संषोधित नीति एवं कार्यक्रम प्रस्तुत है।

नीति और कार्यक्रम

1. कृषि और पशुपालन
भारत कृषि प्रधान देश है और कृषि 76 प्रतिशत लोगों की जीविका का साधन कृषि है फिर भी आजादी के बाद हमारे देश में कोई कृषि नीति नहीं बनी। कृषि पर आदमियों का बहुत अधिक भार है। इस भार को कम करके लोगों को दूसरे धन्धों में लगाना होगा और प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ाना हेगा। उत्पादन लागत घटाना होगा जिससे कि कृषि लाभकरी पेशा बन सके।
(क) ‘अपना दल’ प्राथमिकता के आधार पर 10 वर्षों के अन्दर सम्पूर्ण कृषि योग्य भूमि की सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करायेगा।
(ख) अध्ययन और सर्वे कराकर निर्धारित अवधि के भीतर कृषि को सूखे और बाढ़ से बचाने का स्थाई हल निकाला जायेगा।
(ग) ट्रस्ट के नाम पर लाखों एकड़ जमीन बेकार पड़ी है। ‘अपना दल’ ट्रस्टशिप समाप्त करके जमीन को भूमिहीनों में बांट देगा। बहुत लोग बड़ी-बड़ी खेती के मालिक हैं और खेती नहीं करते हैं, व्यापार या उच्च पद पर नौकरी करते हैं उनको एक धन्धा चुनने की छूट देकर उनकी जमीन भूमिहीनों में बांट दी जायेगी जिससे उत्पादन बढ़ सके। पूंजीपतियों को कृषि और बागवानी क्षेत्र मसे मुक्त रखा जायेगा।
(घ) कृषि योग्य फालतू एवं सीलिंग से निकली जमीन भूमिहीनों में बांट कर ख्ेती कराई जायेगी। जो जमीन खेती लायक नहीं है उस पर भूमिहीनों द्वारा फलदार या लकड़ी वाले वृक्ष लगवाये जायेंगे।
(ड) कृषि की उपज का मूल्य निर्धारण, उसकी लागत बाजार मूल्य को ध्यान में रखकर किया जायेगा जिससे कृषक की उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके।
(च) कृषि में वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर पैदावार बढ़ाई जायेगी और लागत कम की जायेगी तथा कृषक जो भी पैदा करेगा सरकार उसे निर्धारित मूल्य पर खरीदने की गारण्टी देगी।
(छ) कृषि से सम्बन्धित उपकरण और ट्रेक्टर सभी प्रकार के कर मुक्त होंगे। उत्पादन लागत घटाने के लिए छोटे आकार और कम कीमत के उपयोगी ट्रेक्टर/अन्य यन्त्रों का निर्माण कराया जायेगा।
(ज) ऐसी फसलों के उत्पादन पर विशेष बल दिया जोयगा जिनके या उनके उप उत्पादन के निर्यात की सम्भावना ज्यादा हो। लघु और कुटीर उद्योग के लिए कच्चा माल खेतों से तैयार किया जायेगा।
(झ) कृषि का उत्पादन बढ़ाने के लिए खाद, पानी बिजली और दवा कृषि के लिए उत्पादन लागत पर उपलब्ध कराया जायेगा। जो कृषक निर्धारित मानक से अधिक उत्पादन करेगा उसे बोनस दिया जायेगा और जो मानक से कम उत्पादन करेगा उसको जमीन सरकार वापस ले लेगी।
(ट) दुधारू और मांस वाले पशु जैसे गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सुअर और मुर्गी का व्यवसायिक स्तर पर उत्पादन और विपणन की व्यवस्था की जायेगी।
(ठ) मत्स्य पालन को लाभकारी और रोजगार परक बनाने के लिए सहकारी समितियों को समाप्त करके पेशेवर मछुआरों को व्यक्तिगत पट्टे दिये जायेंगे समुद्र में मछली पकड़ने का काम बड़ी कम्पनियों के बजाये पेशेवर मछुआरों को दिया जायेगा नदियों से बालू निकालने का काम भी इन्हीं लोगों को दिया जोयगा।
2. उद्योग (क) अपना दल जापान और जर्मनी की तरह लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देगा। जो चीजें इन उद्योगों में बन सकती है उनके लिए बड़े उद्योग लगाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया जायेगा। बड़े उद्योग उन्हीं चीजों के लिए लगाये जायेंगे जो चीजें लघु या कुटीर उद्योग में नहीं बनाई जा सकती है।
(ख) सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों के संचालन मंडल में सरकार, उत्पादक मजदूर और उपभोक्ता जनता के बराबर-बराबर प्रतिनिधि रखे जायेंगे। जिससे सरकार को उचित लाभ उत्पादक को अधिक सुविधा और उत्तम क्वालिटी, अधिकतम उत्पादन की गारन्टी के साथ-साथ उपभोक्ता को सस्ता और समुचित माल मिल सके।
(ग) कारखानों को बीमारी से बचाने के लिए उसी कारखाने के लाभ में से डैप्रिशिएशन कोष की स्थापना की जायेगी जिससे मशीन के खराब होने पर नई मशीन खरीदी जा सके।
(घ) उद्योग की स्थापना वहीं की जायेगी जहां कच्चा माल उपलब्ध होगा जिससे स्थानीय लोगों का विकास हो सके।
(ड) शुगर काम्प्लेक्स का निर्माण करके गन्ने के पौधों का पूरा उपयोग किया जायेगा जिससे उपभोक्ता को उत्तम किस्म की चीनी उचित दर पर मिल से तथा गन्ना उत्पादक को गन्ने को ऊॅंची कीमत मिल सके। शराब की जगह ब्राजील की तरह पावर एल्कोहल बनाकर डीजल-पेट्रोल के आयात को कम किया जायेगा। खाद और कागज के आयात को भी रोका जा सकेगा।
(च) जमीन से निकलने वाली गैस को ‘‘नो प्राफिट नो लास’’ पर उर्वरक कारखानो को देकर सस्ती दर पर खाद का उत्पादन कराया जायेगा जिससे अनुदान की व्यवस्था से बचा जा सके।
(छ) उन लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया जायेगा जो कृषि पर आधारित हो और उनके उत्पादन के विक्रय की व्यवस्था सरकार करेगी।
(ज) कपड़ा मिलों के बजाय हैण्डलूम और पावरलूम को प्राथमिकता दी जायेगी। 10 हा0पा0तक बिजली का प्रयोग करने वाले उद्यागों को मीटर हटाकर प्रति हा0पा0 की दर से बिजली दी जायेगी। 3.

शिक्षा


(क) शिक्षा व्यवस्था में आमूल परिवर्तन किया जायेगा। बच्चे पर अनावश्यक किताबों का बोझ कम किया जायेगा। भाग्यवाद, पुर्नजनम, ऊॅंचनीच, छुआछूत और चमत्कार से सम्बन्ध्ति पाठ्यक्रम कितों से हटाकर ऐसे पाठ्यक्रम शामिल किये जायेंगे जिससे बच्चों में राष्ट्रप्रेम, भाईचारा और वैज्ञानिक सोच, राष्ट्रीय एकता, और स्वाभिमान की भावना पैदा हो सके। शिक्षा संस्थाओं को राजनीति से मुक्त रखा जायेगा। शिक्षण और छात्र राजनीति को समाप्त करके शिक्षा का बढ़िया वातावरण बनाया जायेगा।
(ख) सम्पूर्ण देश में सरकारी और प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं में एक समान शिक्षा की व्यवस्था लागू की जायेगी। हाईस्कूल तक शिक्षा मुफ्त और अनिवार्य की जायेगी तथा प्रौढ़ शिक्षा, अनौपचारिक शिक्षा ओैर अन्य फिजूल खर्ची की व्यवस्था बन्द कर दी जायेगी।
(ग) शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के लिए इन्टरमीडिएट समाप्त करके बच्चे की अभिरूचि के अनुसार आगे की शिक्षा की व्यवस्था की जायेगी।
(घ) ग्राम स्तर पर प्राथमिक विद्यालय, ग्राम पंचायत स्तर पर जूनियर हाईस्कूल और न्याय पंचायत स्तर में इण्टर कालेज तक की शिक्षा एवं विकास खण्ड स्तर पर डिग्री शिक्षा की व्यवस्था की जायेगी।
(ड) धंधे पर आधारित शिक्षा देने वाली संस्थाओं को कोई सरकारी मदद नहीं दी जायेगी। सरकार इस बात की भी निगरानी रखेगी कि धर्म की आड़ में कोई ऐसा कार्य न हो जो देश और जनता के लिए हानिकर हो।
4.

अर्थव्यवस्थाः


हमारे देश की कोई आर्थिक नीति नहीं है, जिसके कारण टैक्स चेरी, मुनाफाखोरी, पनप रही है और काले धन को सरकार से मजबूत अर्थव्यवस्था चल रही है बैंकिग व्यवस्था की कोई दिशा निर्धारित नहीं। जिसके कारण बेरोजगारी ओर गरीबी मिटाने में हम पूरी तरह असफल है। घाटे का बजट बनाना ओर घाटे को पूरा करने के लिए अनाप-शनाप आन्तरिक और विदेशी कर्ज लेने के कारण आवश्यक वस्तुओं का अभाव एवं महंगाई आसमान छूती जा रही है जिसे नियंत्रित करने के लिए भयंकर रूप से टैक्स लगाये जाते है। टैक्स की अधिकता के कारण टैक्स चोरी, भ्रष्टाचार और काला धन पनप रहा है। यदि विदेशी कर्ज बंद हो जाये तो हमारी अर्थ व्यवस्था चरमरा कर बैठ जायेगी। अपना दल इस व्यवस्था में आमूल परिवर्तन करेगा और विकास को गति देने के लिए टैक्स में कमी और घाटे का बजट बन्द करेगा। भ्रष्टाचार को रोकने के लिए वित्तीय वर्ष को 1 अक्टूबर ये 30 सितम्बर निर्धारित करेगा।
5.

विधि और न्यायः


हमारे देश की न्यायपालिका की व्यवस्था इतनी लम्बी खर्चीली ओर लचर है कि आम आदमी न्याय पाने की उम्मीद गंवा बैठा है। अपराधी पैसे और आतंक के बल पर छूट जाते है। प्रत्ये जिला स्तर की अदालत पर मुकदमें के निपटारे के लिए एक वर्ष और उच्च अदालतो ंके लिए 6 माह की समय सीमा निर्धारित की जायेगी। लोक अदालत की जगह मोबाइल कोर्ट की स्थापना करके छोटे-छोटे मुकदमों का निपटारा मौके पर ही करने की व्यवस्था की जायेगीं। भ्रष्टाचार मिटाकर सबको सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने के लिए 1861 की पुलिस मैनुअल एवं सी0आर0पी0सी0 में आमूल परिवर्तन किया जायेगा।
6.

विदेश :


गलत विदेश नीति के कारण पूरी दुनिया में हमारा कोई मददगार नहीं है। हमारा किसी भी पड़ोसी से संबंध ठीक न होने के कारण बहुत बड़ी धनराशि हथियार खरीदने पर व्यय करनी पड़ रही है। समस्त पड़ोसी और विकासशील देशें से अच्छे सम्बन्ध ओर मित्रता कायम करना हमारी विदेश नीति होगी। लेकिन देश की सुरक्षा कायम करना हमारी प्राथमिकता होगी। देश की सुरक्षा के लिए सेना को मजबूत एवं आधुनिक बनाया जायेगा।
7.

पर्यावरण सफाई एवं जनस्वास्थ्य :


पर्यावरण अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भ्यावह समस्या बन चुका है। विनाश से रक्षा के लिए इसको रोकना निहायती जरूरत है। अंधाधंध वृक्षों की कटाई, अनियोजित औद्योगीकरण, ख्ुली जगह में मलत्याग और धार्मिक अंधविश्वास से बुरी तरह पर्यावरण दूषित हो रहा है जिससे अनेकानेक नई-नई बीमारियां और विषाणु पैदा हो रहे हे। जो जन स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रहे है। लोगों में जागृति पैदा करके और कानूनों में परिवर्तन के जरिये इसे रोकने का प्रयास किया जायेगा।
हमारे देश में आजादी के बाद भी सिर पर मैला ढोने की गंदी व्यवस्था कायम है और इस काम में लगा व्यक्ति सबसे कम वेतन पाता है वह भी कभी कभी वर्षों तक वेतन नहीं पाता है। यह व्यवस्था हमारे लिए कलंक है। इसे समाप्त करके इस पेशे में लगे लोगों को शिक्षित बनाकर दूसरे कामों में लगाया जायेगा।
गा्रमीण इलाकों में 95 प्रतिशत लोगों को सर्दी, जुकाम, न्यूमोनिया आदि साधारण बीमारियों के इलाज की सुविधा अभी तक उपलब्ध नहीं है जिसके कारण लाखों लोग इन साधारण बीमारियों के प्रति वर्ष मर जाते है। न्याय पंचायत स्तर पर बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा एवं ब्लाक स्तर पर गंभीर बीमारियों के इलाज की व्यवस्था की जायेगी।
8.

भष्टाचार :


भ्रष्टाचार दो प्रकार है जो देश के विकास में कोढ़ का काम कर रहा है।
(क) आर्थिक भ्रष्टाचार : इसकी सबसे बड़ी समस्या काले धन को समानान्तर चलने वाली अर्थ व्यवस्था है। चाहे शेयर घोटाला हो या सुप्रीम कोर्ट के जज रामस्वामी का मामला हो, टैक्स चोरी, आयकर चोरी, तस्करी इन सबमें बड़ा अधिकारी और बड़ा नेता अवश्य शामिल होता है। अपना दल का ऐसा मानना है कि भ्रष्टाचार हमेशा ऊपर से नीचे आता है। कोई भी नेता जिस दिन किसी जिम्मेदारी के पद को संभालेगा उसी दिन उसे उस दिन तक के संयुक्त परिवार के सभी सदस्यों की आय का स्रोत एवं बैंक एकाउण्ट्स का ब्योरा देना होगा। सरकार द्वारा संचालित 90 योजनाओं को समाप्त कर इनके स्थान पर मतदाता पेंषन लागू कर सभी वर्गों को मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जायेगा। भष्टाचार समाप्त करने में जनता का भी सहयोग लिया जायेगा। राज्यों की विधान परिषद देश के लिए बोझ है। इन्हें समाप्त कर दिया जायेगा। निगम और परिषद नेताओं और अधिकारियों के लिए चारागाह है। ‘अपना दल’ इनको समाप्त कर देगा।
(ख)

अपराधिक भ्रष्टाचार :


कत्ल, डकैती, गुण्डागदी, अपहरण, बलात्कार आदि पुलिस के संरक्षण में पनपते है और राजनैतिक दल ऐसे तत्वों को आश्रय देते है। पुलिस को राजनैतिक दबाव से मुक्त रखा जायेगा। किसी भी अपराध के लिए उस क्षेत्र के सिपाही, थाने का प्रभारी दरोगा, क्षेत्राधिकारी और पुलिस अधीक्षक सीधे-सीधे जिम्मेदार माने जायेंगे गुप्तचर व्यवस्था को चुस्त करके पुलिस अधीक्षक के नियन्त्रण के बजाय सीधे गृहमन्त्री एवं मुख्यमंत्री से सम्बन्ध्ति किया जायेगा। अपना दल जनता के सहयोग से अपराधि समाप्त करे सबको सुरक्षा प्रदान करेगा।
(ग) भष्टाचार समाप्त करने के लिए लोक शिकायत एवं भ्रष्टाचार उन्मूलन मंत्रालय खेला जायेगा जिसके लिए एक कैबिनेट मंत्री नियुक्त होगा। गोपनीयता कानून भ्राष्टाचार पर पर्दा डालने का सबसे कारगर हथियार साबित हो रहा है। जनतंत्र में असली मालिक जनता है। जनता के वोट से चुनी गई सरकार जो कुछ भी करती है उसे जानने का जनता के अधिकार है। इसलिए गोपनीयता कानून समाप्त करके शासन और प्रशासन पूर्ण रूप से पारदर्शी बनाया जायेगा। भ्रष्टाचार मिटाने के लिए अधिकारियों और नेताओं पर अंकुश आवश्यक है इसके लिए लोकपाल, चुनाव आयोग, भारत के लेखामहानियंत्रक एवं निदेशक सी.बी.आई. की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष एवं मान्यता प्राप्त दलों के संसद में नेता को सलाह से राष्ट्रपति द्वारा की जायेगी। इन्हें संसद बहुमत से हटा सकेगा ये सरकार के साथ-साथ जनता की शिकायत पर भी जांच करेंगे।
9. बेरोजगारी :
गलत शिक्षा और उद्योग नीति के कारण बेरोगजारी बढ़ रही है और उसको हल करने का कोई उपाय नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण पढ़ा लिखा नौजवान असामाजिक कार्यों में लिप्त हो जाता है तथा विदेशी जासूसी द्वारा आर्थिक लाभ के जाल में फंसकर देशद्रोह ओर आतंकवादी गतिविधियों में संलग्न होकर देश के लिए समस्या बनता जा रहा है।
(क) उत्तम शिक्षा का माहौल तैयार करने के लिए शिक्षक, स्कूल, कालेज ओर विश्व विष्वविद्यालयों को राजनीति से मुक्त रख जायेगा।
(ख) शिक्षा और उद्योगों को मुनाफा के बजाय रोजगारपरक बनाया जायेगा।
(ग) ज्यादा रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कर्मचारी/अधिकारी के सेवानिवृत्ति की आयु 50 वर्ष की जायेगी।
(घ) देश/विदेश में नौकरी या व्यापार के लिए मुफ्त मार्गदर्शन, ट्रेनिंग एवं ऋण की व्यवस्था की जायेगी।
10 साम्प्रदायिकता :
(क) शासन और प्रशासन में बैठे लोग वोट के लिए दंगा करवाते हैं और पुनः मदद करने का ड्रामा करते है। 1947 से आज तक सजा देना तो दूर की बात है दंगे के लिए किसी को दोषी तक साबित नहीं किया जा सका जिससे दंगाईयों का मनोबल बढ़ा है। आज तो राजनीति, प्रशासन, पुलिस, सेना और अदालतें भी साम्प्रदायिक भावना से काम कर रही है। अपना दल साम्प्रदायिकता फैलाना देशद्रोह मानता है। ऐसे लोगों को देशद्रोही मानकर सजा दी जायेगी।
(ख) मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा और गिरजाधर के अस्तित्व निर्धारण की तारीख 15 अगस्त 1947 मानी जायेगी। किसी प्रकार की सरकारी जमीन पर या कार्यालय को बाउण्ड्री के अन्दर केई भी धार्मिक प्रतीक खड़ा करना दंडनीय अपराध होगा और उस समय के कार्यलयाध्यक्ष को दोषी माना जायेगा।
(ग) शासन ओर प्रशासन में बैठे लोग न तो मजार पर चादर चढ़ायेंगे न ही मंदिर, गुरूद्वारा या गिरजाघर के कार्यक्रम में भाग लेंगे। ऐसा करने के लिए पद त्यागना होगा लेकिन सभी लोगों के अपने धर्म के रीति-रिवाज मानने और पूजा करने की व्यक्तिगत छूट होगी। राजनीति को धर्म से अलग रखा आयेगा।
(घ) शासन से किसी भी धर्म को किसी प्रकार की मदद नहीं मिलेगी। सरकारी या सरकार से सहायता प्रापत किसी भी संस्था द्वारा धर्म का प्रचार नहीं होगा। धर्म के आधार पर चलने वाले विद्यालय को कोई सरकारी मदद नहीं दी जायेगी।
11 नारी उत्थान :
हमारे देश की पुरूष प्रधान धार्मिक व्यवस्थाओं को नारी निरीह और अधिकार विहीन बनाकर उसे अबला बना दिया। जिससे नारी हर प्रकार का शोषण और उत्पीड़न सहन करने को बाध्य है। देश की आधा आबादी नारियों की है। नर और नारी जीवन रूपी गाड़ी के दो पहिए है। यदि एक पहिया कजोर होगा तो गाड़ी ठीक से नहीं चल सकती है। नारी को शिक्षा के माध्यम से उसके शोषण और अधिकार को बताकर जागरूक बनाना होगा। नंगे और अश्लील चित्र छाप कर औरत को प्रचार का माध्यम बना दिया गया है जसके कारण छेड़छाड, बलात्कार, दहेज हत्या आज आम बात हो चुकी है। पुरूष की जननी नारी को अन्याय से मुक्ति एवं सम्मान दिलाने के लिए उसके संवेधानिक अधिकारों की जानकारी दिलाकर जागृति पैदा की जायेगी तथा सम्मान की रक्षा के कड़े कानून बनाये जायेंगे।
12 प्रशसकीय व्यवस्था
(क) हमारी प्रशासनिक व्यवस्था सीढ़ी नुमा होने के कारण छोटे से छोटे काम के लिए दर्जनों कर्मचारियों से गुजरना पड़ता है। जिसमें बहुत समय बर्बाद होता है। इसमें आमूल परिवर्तन करके, व्यवहारिक सरल और जिम्मेदार बनाया जायेगा। जिला स्तर पर प्रशासन के लिए जिलाधिकारी, विकास के लिए मुख्य विकास अधिकारी तथा कानून व्यवस्था के लिए पुलिस अधीक्षक जिम्मेदार हांगे। असफलता की दशा में इनके खिलाफ सजा और जुर्माना की व्यवस्था होगी।
(ख) सिपाही, उपनिरीक्षक, लिपिक व अन्य वर्ग 3 एवं 4 के कर्मचारी/अधिकारी जिस पद पर भर्ती होते हैं, उसी पद से रिटायर हो जाते है। जिससे उनके मन में कुंठा भर जाती है। उच्च अधिकारियें की तरह इन्हें भी समयबद्ध प्रोन्नति या समयमान वेतनमान दिया जायेगा।
(ग) समान काम के लिए समान वेतन व्यवस्था लागू होगी। प्रथम और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के वेतन में 3ः2 का अनुपात होगा। स्थानान्तरण आज उद्योग बन गया है। इससे निजात दिलाने के लिए हर स्तर का स्थानान्तरण नीति बनेगी और उसका कड़ाई से पालन होगा। अक्षम साबित होने पर स्थानान्तरण के बजाय उसके विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।
13 चुनाव सुधारः
(क) जनता को उजागरूक बनाने के लिए वोट की कीमत और महत्व को समझाकर वोट डालने की प्रेरणा दी जायेगी। फर्जी वोट को रोकने के लिए मतदाता पहचान-पत्र के बजाय बहुउद्देशीय पहचान-पत्र बनवाया जायेगा जो जाति, आय जोतबही एवं राशन कार्ड आदि का भी काम करेगा। सभी स्तर के चुनाव एक ही मतदाता सूची से कराया जायेगा। बूथ कैप्चरिंग रोकने के लिए चुनाव कार्य में तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेट, पीठासीन अधिकारी और मौके पर मौजूद पुलिस को जिम्मेदार बनाया जायेगा और उसके लिए सजा और जुर्माना की व्यवस्था की जायेगी। चुनाव में काले धन को रोकने के लिए चुनाव खर्च सरकार वहन करेगी और एक ही मंच से सभी उम्मीदवार जनता को सम्बोधित करेंगे। निष्पक्ष चुनाव के लिए जो भी आवश्यक होगा किया जायेगा। चुनाव में धांधली के खिलाफ मुकदमें के शीघ्र निपटारे के लिए अलग से कोर्ट बनेगा और प्रत्येक दशा में 6 माह में अन्तिम फैसला हो जायेगा।
(ख) बार-बार समय से पूर्व चुनाव टालने के उद्देश्य से चुनाव उम्मीदवार के बजाय दलीय आधार पर लड़ा जायेगा। प्राप्त मत के अनुपात में राजनैतिक दलों को अपना प्रतिनिधि नामित करने का अधिकार होगा जिनका कार्यकाल 5 वर्ष का होगा। निर्दलियों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया जायेगा।
(ग) पार्टी के संविधान और घोषण पत्र पर अमल न करने वाले दलों की मान्यता समाप्त करने का अधिकार चुनाव आयोग को दिया जोयगा। दल बदल पर पूरी तरह से रोक लगा दी जायेगी। (घ) संज्ञेय अपराधों में लिप्त व्यक्ति के अदालत से दोषमुक्त होने तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध होगा।
(ड) चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के 6 माह पूर्व से सरकार मतदाताओं को प्रभावित करने वाली कोई घोषणा या उद्घाटन और शिलान्यास का काम नहीं करेगी। न तो चुनाव प्रक्रिया में लगने वाले किसी कर्मचारी/अधिकारी का स्थानान्तरण किया जायेगा। इस दौरान सभी अधिकारी/कर्मचारी चुनाव आयेग के नियंत्रण में काम करेंगे।
14 चुने प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार :
चुने हुए प्रतिनिधियों के वादाखिलाफी करने पर जनता को उन्हें वापस बुलाने का अधिकार होगा। 50 प्रतिशत से अधिक लोग अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उन्हें वापस बुला सकते है। दल-बदल करने पर सदस्यता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
15 ‘अपना दल’ विधान की धारा-29क(5) के अनुसार विर्निदिष्ट उपबन्ध की विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति तथा समाजवाद, पंथ निरपेक्षता ओर लोकतंत्र के सिद्धान्तों के प्रति सच्ची आस्था और निष्ठा रखेगा और भारत की प्रभुता एकता और अखण्डता को अक्षुण रखेगा।

श्रीमती कृष्णा पटेल
राष्ट्रीय अध्यक्ष
अपना दल